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हम-तुम

कुछ कही,कुछ अनकही

Monday, 21 November 2011

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Posted by महेन्द्र प्रताप सिंह at 10:33 No comments:
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महेन्द्र प्रताप सिंह
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश के एक गांव की पाठशाला से विद्यारंभ। कुलभाष्कर आश्रम कृषि महाविद्यालय इलाहाबाद, डा आरएमएल विश्वविद्यालय फैजाबाद, लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा ने सोचने-समझने और लिखने-पढऩे लायक बनाया। विधि स्नातक, पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और हिन्दी में सिल्वर मेडल के साथ परास्नातक के बाद अखबारों में लिखने का शौक लगा। तकरीबन 20 वर्षों से पत्रकारिता के पेशे में। नवभारत टाइम्स से कॅरियर की शुरुआत। राष्ट्रीय सहारा में लंबे समय तक सेवाएं दीं। अब पत्रिका समूह में उप समाचार संपादक के रूप में कार्यरत। कॅरियर व युवाओं पर आधारित अब तक कई पुस्तकें प्रकाशित।
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